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लगातार दलित उत्पीड़न की घटनाओं ने दलित समाज के सब्र का बांध तोड़ा- विक्रम लोहिया

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विक्रम लोहिया, कांग्रेस नेता
नई दिल्ली. 08 अप्रैल. एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद हुए बदलाव तथा उसके बाद दलित संगठनों के द्वारा बुलाये गए भारत बंद में हुई हिंसा के पीछे सत्ता पक्ष का हाथ बताते हुए कांग्रेस नेता विक्रम लोहिया ने कहा है, कि मौजूदा सरकार के समय में दलित उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि बीते चार सालों में लगातार बढ़ती दलित उत्पीड़न की घटनाओं ने दलित समाज के सब्र का बांध तोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के पीछे भी सत्ता पक्ष ही है. लोहिया ने कहा कि देश में दलितों के साथ देश भर में समय-समय पर होने वाली भेदभाव की घटनाओं से सभी परिचित हैं. लेकिन जबसे मौजूदा भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से दलितों के उत्पीड़न की घटनाओं में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है. कांग्रेस नेता ने कहा कि आज देश भर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमाएं तोड़ी जा रही हंै और कार्रवाई के नाम पर भी दलितों का ही दमन किया जा रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जिस एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव को लेकर दलित संगठन शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, सरकार ने बाहुबल के साथ उसे हिंसक करने का काम किया. यह भी पढ़ें : दलितों को लेकर विपक्ष का दोहरा रवैय्या, दलित आंदोलन को अराजक बनाकर दलित समाज की साख को बट्टा लगाया  विक्रम लोहिया ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार में दलितों और अल्पसंख्यकों के हित सुरक्षित नहीं हैं और सरकार देश के विकास को छोड़कर इन समाजों के उत्पीड़न का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट में हुए बदलाव के बाद अगर सरकार ने अपनी जिम्मेदारी सही तरह से निभाते हुए साथ-साथ ही पुनर्विचार याचिका दाखिल की होती, तो इतना बवाल नहीं होता. आंदोलन के हिंसक होने के पीछे सरकार द्वारा विपक्ष पर आरोप लगाए जाने पर लोहिया ने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में जो भी कुछ अनपेक्षित घटता है, उस सबके पीछे सरकार विपक्ष का हाथ बताकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ती है. उन्होंने कहा कि सरकार दलितों के सम्मान के साथ खेलना बंद करे और समाज के इस पीड़ित वर्ग के लिए न्याय सुनिश्चित करे.

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