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कवियों ने दिया ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश, नांगलोई में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन

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संवाददाता.
नई दिल्ली. 30 नवंबर. अखिल भारतीय साहित्य परिषद् न्यास से संबद् व इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती दिल्ली एवं जयभारती साहित्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में ताली योगा ग्रुप कुँअरसिंह नगर, नांगलोई द्वारा सुप्रसिद्ध छन्द शिल्पी स्व. डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती के 98वें जन्मदिवस पर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. स्थानीय अटल बिहारी पार्क हनुमान चौक पर आयोजित इस कवि सम्मेलन में उपस्थित मुख्य अतिथि पवन मिश्रा ने माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का उद्घाटन किया. राष्ट्रीय कवि-गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य के संचालन तथा अन्तर्राष्ट्रीय गीतकार डॉ. राजेन्द्र ‘राजन’ की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन को विख्यात गजलकार देवेन्द्र माँझी का सानिन्ध्य मिला.
कवि सम्मेलन का शुभारंभ नन्ही कवयित्री काजल की सरस्वती वंदना तथा एटा से पधारे युवा गीतकार सृजन ‘शीतल’ के मधुर गीत से हुआ. तत्पश्चात उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से पधारे अन्तर्राष्ट्रीय गीतकार डॉ. राजेन्द्र ने जब अपना गीत ‘चले आये हैं मदारी मेरे गाँव में’ सुनाया तो श्रोताओं ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया. यह भी पढ़ें : आभूषणों के साथ-साथ उपहार देकर वर्धमान ज्वैलर्स ने मोहा महिलाओं का मन, मेगा बंपर प्राइज का भी आयोजन देवेन्द्र माँझी ने अपनी गजलों व दोहों से जनमानस से खूब वाह-वाहि लूटी. वहीं शामली से आये गीतकार पवन कुमार ‘पवन’ ने बेटियों पर अपने दोहे व गीतों से श्रोताओं के मानस को झकझोर कर रख दिया.
गजलकार कर्ण सिंह ‘कर्ण’ की गजल के इस शेर ‘तेरे दागों की हो खबर तुझको, आईना खुद को भी दिखाया कर’ को श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सुना. इस अवसर पर गीतकार प्रवीण आर्य द्दारा मस्ती के साथ सुनाये गीत ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया तो लखनऊ से पधारी गीतकार सुमन ‘सुरभि’ ने श्रोताओं के दिलो-दिमाग पर गीत का मधुरिम रंग चढ़ाया.
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य ने अपने मुक्तक व गीतों से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया. बेटियों पर सुनाये उनके इस मुक्तक का श्रोताओं ने खड़े होकर तालियों के साथ स्वागत किया.
बेटियाँ दिल के पास होती हैं.
बेटियाँ सबसे खास होती हैं.
ये खिलाती हैं मन के उपवन को.
ये कहाँ कब उदास होती हैं.
इस अवसर पर सभी कवियों व हिन्दी सेवियों पवन मिश्रा, धर्मपाल भारद्वाज, डॉ. गोपाल, दीनदयाल यादव, सत्यम कौशिक, कुँअरसिंह, संजय शर्मा, भरत शर्मा, विवेक आर्य व सुश्री पूनम समोर का अभिनन्दन शाल, पुष्प गुच्छ व प्रतीक चिन्ह देकर किया गया.

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