Home State News छठ पर्व की आड़ में पूर्वांचल की सियासत साधने की कोशिश…!

छठ पर्व की आड़ में पूर्वांचल की सियासत साधने की कोशिश…!

197
0
SHARE
manoj tiwari at chath ghat yamuna
नई दिल्ली. 24 अक्तूबर. पूर्वांचल के महापर्व कहे जाने वाले छठ पर्व की शुरूआत से पहले, हर बार की तरह इस बार भी राजनीति अपने पूरे जोशो-जलाल पर है. राजधानी में पूर्वांचल की बड़ी आबादी के चलते राजनेता छठ महापर्व को भी अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने से बाज नहीं आते हैं.
मनीष सिंह, अध्यक्ष, भाजपा पूर्वांचल प्रकोष्ठ दिल्ली प्रदेश
कमल बंसल, अध्यक्ष, तीर्थ यात्रा विकास समिति
दिल्ली सरकार जहां छठ की तैयारियों को लेकर छठ घाटों की साफ-सफाई और सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वही मुख्य विपक्षी दल भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी इन तैयारियों को आधा-अधूरा बताते हुए अपने स्तर से प्रयास करने की बात कर रहे हैं. प्रदेश भाजपाध्यक्ष ने इस मामले को लेकर छठ पूजा समितियों के लिए एक हेल्पलाईन नंबर 9711496114 जारी कर दिया है, जिससे छठ समितियां सहायता प्राप्त कर सकेंगी। जहां भाजपा दिल्ली सरकार पर हमला बोलते हुए अपने स्तर पर तैयारियों की बात कर रही है, वहीं दिल्ली सरकार इसे छठ पर्व पर भाजपा की ओछी राजनीति का नाम दे रही है. यह भी पढ़ें : भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोनिया विहार छठ घाट पर श्रमदान किया
छठ पर्व की शुरूआत से दो दिन पहले ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने छठ घाटों की सफाई का अभियान शुरू किया, जिसमें उनके साथ अनेक भाजपा कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. इस दौरान तिवारी ने कार्यकर्ताओं के साथ श्रमदान करते हुए कहा कि छठ व्रतियों के लिए बेहतर सुविधाओं के लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगे. हांलाकि राजधानी में छठ पर्व की व्यवस्था को देखने वाली तीर्थ यात्रा विकास समिति के अध्यक्ष कमल बंसल कहते हैं, कि छठ पर्व की तैयारियों में कोई कमी नहीं है. वह हर स्तर पर छठव्रतियों के लिए तमाम सुविधाएं जुटाने का दावा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि साफ-सफाई का काम लगातार जारी है और वह दिल्ली के तीनों नगर निगमों से भी संपर्क में हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ एक जगह पर छठ घाटों पर अव्यवस्था के सवाल पर उन्होंने कहा कि वहां झाग से संबंधित समस्या का जिक्र किया जा रहा है, वह हरियाणा द्वारा पानी न छोड़े जाने के कारण है. जैसे ही हरियाणा से पूरा पानी छोड़ा जाएगा यह परेशानी खत्म हो जायेगी. उन्होंने कहा कि बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष ज्यादा घाट बनाए गए हैं.हालांकि वे स्वीकार भी करते हैं, कि राजनैतिक दल इस पर्व भी राजनीति करते हैं. वहीं इसका खंडन करते हुए भाजपा पूर्वांचल मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष मनीष सिंह कहते हैं, कि छठ पर्व हमारी आस्था का प्रश्न है और इस पर राजनीति का कोई सवाल ही नहीं उठता है. वह कहते हैं, कि छठ घाटों की तादाद 565 ही है, जो कि रजिस्टर्ड हैं. मनीष कहते हैं, कि दिल्ली सरकार ने कुछ दिन पहले 90 घाटों का अप्रूवल कैंसिल कर दिया था, जिन्हें बाद में अप्रूवल दिया गया है. हेल्पलाईन जारी करने का क्या उद्ेश्य है और लगभग 2600 छठ समितियों के लिए यह कितना कारगर साबित होगा के जवाब में मनीष सिंह कहते हैं, कि इस हेल्पलाईन पर बीते 3 दिन में ही हमें साढ़े तीन हजार से ज्यादा कॉल मिली हैं. वह कहते हैं, कि निश्चित तौर पर छठ समितियों की तुलना में यह नंबर नाकाफी है और अगले वर्ष वह इस सुविधा को कॉल सेंटर के तौर पर विकसित करेंगे. लेकिन शॉर्ट नोटिस पर दिल्ली सरकार की नाकामियों को देखते हुए भाजपा ने यह हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिसे समितियों का बेहतर रिस्पांस मिल रहा है. वह कहते हैं, कि दिल्ली सरकार द्वारा उचित कदम न उठाये जाने के बाद भाजपा ने यह तैयारियां खुद से करने का निश्चय किया और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी के नेतृत्व में तीनों नगर निगम इस काम में जुटे हुए हैं. हरियाणा से पानी के मसले पर बात करते हुए मनीष सिंह कहते हैं, कि प्रदेश अध्यक्ष ने इस बारे में भी हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से बात की है और उन्होंने आश्वासन दिया है, कि छठ पर्व पर यमुना में पानी की समस्या नहीं होगी. हालांकि निगम में वरिष्ठ पद पर रह चुके भाजपा के ही एक पदाधिकारी प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी के इस कदम को त्यौहार पर राजनीति मानते हैं. वह कहते हैं, कि हेल्पलाईन जारी कर प्रदेश अध्यक्ष क्या कर सकते हैं? अगर वह निगम के अमले से काम कराने की बात कर रहे हैं, तो फिर ये हेल्पलाईन निगम के नाम से ही क्यूं जारी नहीं की गई? वह कहते हैं, कि खुद निगम के क्षेत्रों में सफाई के क्या हालात हैं, किसी को बताने की जरूरत नहीं है? वह प्रदेशाध्यक्ष के सांसद होने के नाते भी उनकी भूमिका पर प्रश्न खड़ा करते हुए कहते हैं, कि एक सांसद होने के नाते उन्होंने इन घाटों की व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाये हैं? हालांकि यह भी कड़वा सच है, कि सरकारों और राजनैतिक दलों की तमाम कवायदों और दावों के बीच इन छठ घाटों की समस्याएं जस की तस रहती हैं. और हर बार इन्हीं आधी-अधूरी तैयारियों के बीच ही छठव्रती अपने व्रत का समापन करने को मजबूर होते हैं, बावजूद इसके राजनैतिक दल अपनी राजनीति चमकाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रखते हैं. तमाम पक्षों के अपने दावे हैं, लेकिन यह सच है कि दिल्ली में पूर्वांचल समाज आज इस हालात में है कि वह यहां की राजनीति की दिशा को निर्धारित कर सकता है. और इसलिए राजनेता भी इस पर्व को अपने लिए राजनीतिक पहुंच का एक बेहतर अवसर मानते हैं. पूर्वांचल की ताकत का असर दिल्ली की राजनीति पर देखा जा सकता है, इसलिए हर कोई इस पर्व की आड़ में अपनी सियासी गोटियां खेलने को तैयार बैठा है.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here