Home Astro राहु चन्द्र की युति बनायेगी चिन्ता का योग..!

राहु चन्द्र की युति बनायेगी चिन्ता का योग..!

117
0
SHARE
सांकेतिक चित्र
राहु और चन्द्र किसी भी भाव में एक साथ जब विराजमान हों, तो हमेशा चिन्ता का योग बनाते हैं. राहु के साथ चन्द्र होने से दिमाग में किसी न किसी प्रकार की चिन्ता लगी रहती है. पुरुषों को बीमारी या कामकाज की चिन्ता लगी रहती है. तो
आचार्य नवराज पंत
महिलाओं को अपनी सास या ससुराल, खानदान के साथ बंधन की चिन्ता लगी रहती है. राहु और चन्द्रमा के एक साथ रहने पर हमेशा देखा गया है. कुंडली में एक भाव के अन्दर दूरी चाहे 29 अंश तक क्यों न हो, वह अपना फल जरूर देता है. इसलिये राहु जब भी गोचर से या जन्मकुंडली की दशा से एक साथ होंगे तो जातक का चिन्ता का समय जरूर सामने होगा.
चंद्र राहु वाले व्यक्ति का दिमाग वकीलों की तरह चलता है. पर कहीं न कहीं उसे मानसिक परेशानी बहुत होती है. पंचम का राहु औलाद और धन को धुएं में उड़ा देता है. यह भी पढ़ें : क्या हैं अष्ट सिद्धियाँ और नव निधियां…? राहु का संबंध दूसरे और पांचवें स्थान पर होने से जातक को सट्टा, लाटरी और शेयर बाजार से धन कमाने का बहुत शौक होता है. राहु के साथ बुध हो तो वह सट्टा, लाटरी, कमेटी, जुआ और शेयर आदि की तरफ बहुत ही लगाव रखता है. अधिकतर मामलों में देखा गया है, कि इस प्रकार का जातक निफ़्टी और आई.टी. वाले शेयर की तरफ अपना झुकाव रखता है. अगर इसी बीच में जातक का गोचर से बुध अस्त हो जाये तो वह उपरोक्त कारणों से लुटकर सड़क पर आ जाता है. और इसी कारण से जातक को दरिद्रता का जीवन जीना पडता है. उसके जितने भी संबंधी होते हैं, वे भी उससे परेशान हो जाते हैं. और वह अगर किसी प्रकार से घर में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो वे आशंकाओं से घिर जाते हैं.
राहु-गुरु चांडाल योग
राहु और गुरु का आपसी संबंध यदि सही तरहसे होता है. और केतु सही है, तो जातक को पायलेट की नौकरी करनी पड़ती है. लेकिन मंगल साथ ना हो तो जातक पायलेट बनने की बजायजिन्दा आदमियों को दूर पहुंचाने के पंडिताई करने लगता है. और मरी हुई आत्माओं के क्रियाकर्म का काम करने के बाद स्वर्ग में पहुंचाने का काम भी हो जाता है. 
राहु-अस्त बुध
बुध अस्त में जन्मा जातक कभी भी राहु वाले खेल न खेले तो बहुत सुखी रहता है. राहु का संबंध मनोरंजन और सिनेमा से भी है. राहु वाहन का कारक भी है. राहु को हवाई जहाज के काम और अंतरिक्ष में जाने के कार्य भी पसंद हैं. इसलिये बुध अस्त वाले जातक को लाटरी, सट्टा, जुआ, शेयर आदि से दूर रहकर ही अपना जीवन मेहनत वाले कामों को करतेहुए बिताना ठीक रहता है.
राहु के साथ मंगल
राहु के साथ मंगल वाला व्यक्ति धमाके करने में माहिर होता है. उसे विस्फोट करने और आतिशबाजी के कामों में महारता हासिल होती है. वह किसी भी प्रकार बारूदी काम करने के बाद जनता को पलक झपकते ही ठिकाने लगा सकता है. राहु तेज हथियार के रूप में भी जाना जाता है, अगर कुंडली में शनि+मंगल+राहु की युति है, तो बद मंगल के कारण राहु व्यक्ति को कसाई का रूप देता है. उसे मारने-काटने में आनन्द महसूस होता है.
राहु गुरु की युति
राहु के साथ जब गुरु या तो साथ हो, या आगे-पीछे हो तो वह अपनी शरारत करने से नहीं हिचकता है. जिस प्रकार से एक झगड़ालू व्यक्ति किसी को मारने से नहीं हिचकेगा. लेकिन एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति किसी को मारने से पहले दस बार कानून और भलाई-बुराई को सोचेगा.
राहु के साथ शनि
राहु के साथ शनि होने से राहु खराब हो जाता है. जिसके भी परिवार में इस प्रकार के जातक होते हैं, वे शराब-कबाब और भूत के भोजन में अपना विश्वास रखते हैं. और अपनी परिवारिक मर्यादा के साथ उनकी जमी-जमाई औकात को बरबाद करने के लिये ही आते हैं. और बरबाद करने के बाद चले जाते हैं.
पर शनि और राहु इकठे होने के फायदे भी बहुत हैं. व्यक्ति यदि अपने कर्म सुधार ले तो सोने पे सुहागा है. जैसे शनि एक सांप है और राहु उसके सर की मणि है या यूँ कहिये कि इच्छाधारी सांप. इस राहु के कारण शुक्र अपनी मर्यादा को भूलकर अलावा जाति से अपना संबंध बना बैठता है और शादी अन्य जाति में करने के बाद अपने कुल की मर्यादा को समाप्त कर देता है. शुक्र का रूप राहु के साथ चमक-दमक से जुड़ जाता है.
(आचार्य नवराज पन्त)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here