Home Astro इस बार इसलिए खास है शनिश्चरी अमावस्या का पर्व

इस बार इसलिए खास है शनिश्चरी अमावस्या का पर्व

244
0
SHARE
सांकेतिक चित्र
धर्म विशेष.
शनिश्चरी अमावस्या का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा. भगवान शनिदेव को यह दिन अत्यन्त प्रिय है, क्यूंकि शनिश्चरी अमावस्या के दिन ही भगवान श्री शनिदेव का प्रादुर्भाव हुआ था. प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी प्राचीन शक्ति पीठ देवी मंदिर शनिधाम में शनिश्चरी अमावास्या का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. मंदिर के आचार्य पंडित नवराज पन्त ने बताया कि इस वर्ष शनिश्चरी अमावस्या
आचार्य नवराज पंत
का पर्व श्रावण मास की अमावस्या के दिन है. श्रावण मास श्री भोलेनाथ देवाधिदेव श्री शिवजी को समर्पित है और शनिदेव शिवजी को अत्यन्त प्रिय हैं. अत: शनिदेव जी के 108 नामों में एक नाम शिवप्रिय भी है. इसलिए इस बार की अमावस्या का महत्व अधिक माना जाएगा. यही नहीं भगवान शिव शनिदेव के अधिष्ठात्री देव भी हैं. नक्षत्र की दृष्टि से देखें तो उस दिन अश्लेषा नक्षत्र रात्रि पर्यन्त है. अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी सर्प हैं. भगवान शिव जी ने सर्प धारण किया हुआ है, अत: इससे यह दिन और उत्तम हो जाता है. यह भी पढ़ें : बालाजी निरोगधाम में गुरू पूजन और गौपूजन के साथ धूमधाम से मना गुरू पूर्णिमा का पर्व राशियों की दृष्टि से शनिश्चरी अमावस्या और महत्वपूर्ण है, क्योंकि उस दिन चन्द्रमा अपनी ही राशि कर्क राशि में स्थित है. कर्क राशि का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है. ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा जल तत्व का कारक ग्रह माना जाता है. जल अर्थात वरूण का स्थान पश्चिम दिशा है और पश्चिम दिशा के स्वामी ग्रह भगवान शनिदेव जी हैं. उस दिन के राशि के स्वामी चंद्रमा को भगवान श्री शिवजी ने अपने मस्तिष्क में धारण किया हुआ है. इस तरह यह दिन पूर्ण रूप से श्रेष्ठ दिवस है. ऐसे श्रेष्ठ दिन में भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से श्री शनिदेव प्रसन्न होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here