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ई-कॉमर्स पर सरकार के पॉलिसी ड्राफ्ट से खुश नहीं व्यापारी, डिजिटल प्लेटफार्म पर डिजिटल भुगतान की मांग

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 03 अगस्त. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी ई-कॉमर्स पर पॉलिसी ड्राफ्ट का कन्फेडरेशन आॅफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने स्वागत करते हुए कहा है, कि देश के ई-कॉमर्स बाजार की विसंगतियों, खामियों और बुराइयों को दूर करने में यह एक बड़ा सकारात्मक कदम है. और सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को देश में कायदे से व्यापार करने हेतु मजबूर करेगा. हालांकि कैट ने इस पॉलिसी ड्राफ्ट में अनेक बुनियादी खामियां गिनवाते हुए कहा है, कि कैट शीघ्र ही नीति दस्तावेज पर एक विस्तृत ज्ञापन केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु को सौंपेगा.
गौरतलब है, कि बीते दो वर्ष से कैट लगातार ई-कॉमर्स के लिए एक नीति
praveen khandelwal
और एक रेगुलेटर गठित करने की मांग कर रहा था. और इन दोनों को नीति दस्तावेज में समाविष्ट किया गया है. यह भी पढ़ें : गाय को कूड़ा-कचरा खाने से बचा सकें, वही सच्ची गौ सेवा- योगेश भाटी कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ई-कॉमर्स व्यापार में कैश आॅन डिलीवरी पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होनी चाहिए. इससे ई-कॉमर्स कंपनियों को कर बचाने में सहायता मिलती है. जब ई-कॉमर्स एक डिजिटल प्लेटफार्म है तो उस पर भुगतान भी डिजिटल रूप से ही होना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोई भी कम्पनी ई-कॉमर्स का सहारा लेकर देश के रिटेल बाजार में अपने माल को डंप न कर दे, इसका समुचित प्रावधान नीति में रखना जरूरी है.
भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा कि नीति बनाने के लिए गठित थिंक टैंक डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने पर विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के व्यापार में आंतरिक सुधार के लिए एक मजबूत ई-कॉमर्स का राष्ट्रीय ढांचा होना बेहद आवशयक है, लेकिन ऐसा ढांचा पूर्ण रूप से विसंगतियों से कतई दूर होना चाहिए. व्यापारी नेताओं ने कहा कि ई-कॉमर्स में डेटा सुरक्षा बेहद जरूरी है. दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कि नीति दस्तावेज में भुगतान के लिए रूपए कार्ड को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जबकि रुपये कार्ड बुरी तरह से फेल हो चुका है और अनेक वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक आम लोगों के उपयोग में नहीं आता. इसलिए भारत क्यू आर को बढ़ावा देना चाहिए, जिसमें सभी प्रकार के डिजिटल भुगतान किये जा सकते हैं.

 

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