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इस दीपावली इन वास्तु नियमों को अपनाएं, जीवन में भर जायेगी खुशहाली

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दीपावली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और खुशहाल त्यौहार है. हम सभी अपने जीवन को सुखी और समृद्ध देखना चाहते हैं तथा दीपावली का त्यौहार इसी भावना का प्रतीक है. 
कहते हैं कि स्वभाव से चंचला लक्ष्मीजी स्वच्छ एवं सकारात्मक ऊर्जा वाले स्थानों में निवास करना पसंद करती हैं. वास्तु के अनुसार कोई भी वस्तु जब बहुत समय तक अपना स्थान नहीं बदलती या इस्तेमाल नहीं होती तो उसका ऊर्जा क्षेत्र दूषित और नकारात्मक होने लगता है. जिसे वास्तुदोष भी कहा जाता है. शायद इसलिए दीपावली से पहले सफाई एवं रंगाई की प्रथा का चलन हुआ, जिसमें हम घर का एक-एक सामान बाहर निकालकर व्यवस्थित करते हैं.  ऊर्जा का यह बदलाव मन को खुशी देता है तथा प्रगति के नए अवसरों के आगमन को दिशा देता है. दीपावली के अवसर पर हम इसी स्वच्छ और निर्मल मन से पूरे साल की नकारात्मकता को खत्म कर अपनी आंतरिक और बाह्र ऊर्जा का नवीनीकरण करते हैं. दीपावली पर प्रगतिशीलता की भावना और स्थिर लग्नों के तहत नए बही खातों का शुभारंभ किया जाता है. हमारी यह पत्रिका इसी मार्ग को प्रशस्त करने में सहायक है. धन, समृद्धि और सफलता की देवी ‘माँ भू-देवी’ एवं ‘माँ लक्ष्मी’ अपने पति परमेश्वर विश्व पालनकर्ता भगवान विष्णु सहित आपके घर को शुभ आशीर्वाद प्रदान करें.

पूजन के पूर्ण लाभ एवं धन वृद्धि हेतु निम्नलिखित सिद्ध वास्तु उपाय करें.
यह सभी उपाय घर एवं कार्यस्थल सभी के लिए मान्य हैं.
शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017
* घर की नकारात्मक ऊर्जाओं को निकालने के लिए शाम के समय कपूर की टिकिया किसी पात्र में जलाकर पूरे घर में घुमाएं.
* ऐश्वर्य एवं समृद्धि के लिए शुक्र देव की सिद्ध वास्तु जरकन प्लेट दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं.
* गृह सज्जा की कोई भी वस्तु खरीदें.
शनिवार, 14 अक्तूबर 2017
* पश्चिम दिशा में नीलम जड़ित सिद्ध वास्तु शनि देव की प्लेट लगाएं. यह प्लेट शनि ग्रह के दुष्प्रभाव को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित करती है.
* धर्मस्थान पर दवाइयां या दवाइयों के लिए सुविधानुसार धन दान करें. इस दिन किया गया दान आपको रोगमुक्त रखता है और आपकी आयु में भी वृद्धि करता है.
* अपने शरीर के वजन के दसवें हिस्से जितना अनाज किसी को भी दान करें. यह दान अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी दे सकते हैं.
रविवार, 15 अक्तूबर 2017
* अपने घर की सभी दिशाओं में किन्हीं दो वस्तुओं का स्थान परिवर्तन करें (जो वस्तुएं बहुत लंबे समय से घर में एक ही स्थान पर स्थित हों) जिससे ग्रह और दिशाओं को नई ऊर्जा प्राप्त हो.
* सिद्ध वास्तु माणिक जड़ित सूर्य देव नग की प्लेट पूर्व दिशा में लगाएं. इससे मान-सम्मान एवं यश की प्राप्ति होता है.
सोमवार, 16 अक्तूबर 2017
* चंद्रदेव मोती घर या कार्य क्षेत्र में उत्तर पश्चिम दिशा में पानी के पात्र में डालकर रख दें.
* एक मुट्ठी चावल लाल कपड़े में बांधकर घर की दक्षिण दिशा में स्थापित करें.
बुधवार, 18 अक्तूबर 2017
* उत्तर दिशा में बुध ग्रह के सिद्ध वास्तु पन्ना प्लेट लगाएं.
* उत्तर दिशा में हरियाली वाला पौधा या मनी प्लांट लगाएं.
हनुमान जयंती विशेष दिव्य कवच
* हनुमान जी को दो अनार और चार पीले लड्डू चढ़ाएं.
अति विशेष- अभिमंत्रित हनुमान चालीसा दिव्य कवच को धूपबत्ती करने के बाद स्वयं धारण करें, या घर की दक्षिण पूर्व दिशा में रख दें. यह आपको यश, व्यापार वृद्धि एवं शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाता है. विशेषकर जिनके कार्यों में बाधाएं आती हों, वे इन्हें घर और कार्यालय में अवश्य रखें और दीपावली पर भी पूजा में रखें.
नजर से बचाव- धनतेरस से दीपावली के दिन तक किसी भी दिन नजर बाधा नवग्रह स्टोन सुरक्षा कवच अपने घर कार्यालय एवं दुकान के मुख्य द्वार पर लगाएं.
वास्तु शुद्धिकरण के लिए दिशा-निर्देश
वास्तु शुद्धिकरण के उपाय पूर्ण प्रयास और मनोयोग से करें. इससे दीपावली को रात्रि भवन एक विशेष प्रकार की ऊर्जा से भर जाता है जो विकास, समृद्धि और धन-धान्य प्रदान करता है.
* धनतेरस से पहले घर की या अपनी किन्हीं 5 पुरानी वस्तुओं का दान करें.
* घर से पश्चिम और दक्षिण पश्चिम दिशा में पीली सरसों को फर्श पर बिखेर दें. 15 मिनट बाद उसे झाडू से इकट्ठा कर लें और नाली में डाल दें. इसके बाद इन दिशाओं को पानी से साफ कर दें.
* घर के उत्तर पूर्व क्षेत्र को चावल के पाउड़र से साफ करें एवं साफ पानी से धो दें.
* उत्तर पूर्व क्षेत्र में यदि भंडार हो, तो उस स्थिति में व्यर्थ के सामान को निकाल दें और बाकी बचे सामान को सामंजस्यपूर्वक लगाएं.
* अनावश्यक विद्युत उपकरणों व तारों को हटाएं. दीवार तथा छत पर खुली हुई बिजली की डिब्बियों को बंद करें.
* घर की मुख्य सीढ़ियों के नीचे और ऊपर का स्थान ऊर्जा प्रवाह के लिए रिक्त कर दें.
* घर की छत पर रखें सामान पर विशेष ध्यान दें. यदि टूटी हुई चारपाई, कुर्सियां या जंग लगा लोहा या लकड़ी है, तो हटा दें. यदि कोई उपयोगी सामान है तो उसे दक्षिण – दक्षिण पश्चिम दिशा में रखें.
लक्ष्मी स्वरुप दक्षिणावर्ती शंख
दक्षिणावर्ती शंख चंद्रमा और सूर्य के समान देवस्वरूप है. इस संघ के मध्य में वरुण पृष्ठ भाग में ब्रह्मा और अग्रभाग में गंगा का निवास है. विष्णु जी की आज्ञा से सारे तीर्थ शंख में निवास करते हैं. तथा यह शंख कुबेर स्वरुप है, इसलिए इसकी पूजा अवश्य करनी चाहिए.
लाभ- सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि, लक्ष्मीजी का घर में स्थाई वास और आपसी प्रेम में वृद्धि होती है. नकारात्मक ऊर्जाओं, दुर्भाग्य, अभिचार और ग्रहों के दुष्प्रभाव का शमन होता है.
धनतेरस, मंगलवार 17 अक्तूबर 2017
शास्त्रों में धनतेरस को कुबेर साधना दिवस माना गया है. कुबेर लक्ष्मी के सेवक द्वारपाल, खजाने के रक्षक देव हैं. इनकी कृपा से ही लक्ष्मी का आगमन होता है. अत: धनतेरस को विधि-विधान सहित यक्षराज कुबेर की पूजा करनी चाहिए.
* विशेष- पीतल का सिद्ध वास्तु श्री यंत्र एवं कुबेर जी को घर कार्यालय में (इमेज में देखें– रखकर पूजन करें)
* विशेष- पीतल से बनी नवग्रह चौकी की पूजा करें.
* पूजन से पहले दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर रखें. पूजनोपरांत पूरे घर में छींटा लगाएं.
* हल्दी और चावल पीसकर उसके घोल से घर के प्रवेश द्वार पर ओम बनाएं.
* सोना चांदी सुविधानुसार अवश्य खरीदें, फिर पूजन में रखने के बाद लाल कपड़े में चांदी और पीले कपड़े में सोना तिजोरी में रखें.
* उत्तर दिशा में धनतेरस से 72 घंटे तक रोशनी रखें और पीतल का सिद्ध वास्तु श्रीयंत्र रखें.
* घर में सुगंधित फूल लायें और सुगंधित अगरबत्ती सुबह शाम जलाएं.
* नई झाड़ू खरीदकर उससे घर की सफाई करें और उसी को इस्तेमाल मे लाएं.
* तिकोने मूंगे से बनी मंगलदेव की प्लेट पूजा में रखने के पश्चात दक्षिण दिशा में लगाएं जो कार्य में आने वाली उलझन को समाप्त कर नये कार्यक्षेत्र खोलती है.
दीपावली, बृहस्पतिवार 19 अक्तूबर 2017
* प्रात: काल – अशोक एवं आम के पत्ते धोकर लाल धागे में पिरोकर मुख्य द्वार पर लगाएं.
* लक्ष्मी पुष्प- कमल का फूल पूजन के समय लक्ष्मी जी को अर्पित करें, बाद में तिजोरी में रखें.
* ऊर्जा स्रोत- पूजन से पहले दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर रखें. पूजनोपरांत पूरे घर में इस जल से छींटा लगाएं.
* ऋद्धि-सिद्धि- पूजन के समय लक्ष्मी गणेश को लाल या सुनहरे रंग के आसन पर रखें और स्वयं पीले वस्त्र के आसन पर बैठकर पूजन करें.
* संपन्नता- घर के द्वार पर मंदिर के दोनों और या पूजा की चौकी के दोनों ओर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं.
* धनसंचय- सुनहरे रंग का पेन, नीली या काली स्याही वाला पूजा में रखें और बाद में बही-खाते लिखने के लिए प्रयोग करें.
* धन वृद्धि- चांदी के 5 या 11 सिक्के पूजन के समय लाल वस्त्र पर रखें.
* यश प्राप्ति- पीतल से बने सूर्य देव पूर्व दिशा में लगाएं.
* गृह सुख समृद्धि- सिद्ध वास्तु नवग्रह स्टोन प्लेट पूजा में अवश्य रखें.
* पितृ विशेष- पितरों से विशेष आशीर्वाद के लिए पीली या लाल एवं सफेद फूलों की माला उनके चित्र पर लगाएं. और उनके निमित्त सुविधानुसार कपड़े, फल, मिठाईयां, धनराशि निकालें.
विशेष- हमारा आभामंडल सात मूल चक्रों और पांच तत्वों से मिलकर बना है. जो हमारे जीवन के हर पहलू को देखते हैं, जैसे सेहत, धन, मन, बुद्धि, संबंध, विकास, ज्ञान एवं शांति, जो हमारे घर एवं कार्यस्थान को हमारे साथ जोड़ता है. हमारे प्राचीन वेदों से प्रेरित होकर सिद्ध वास्तु सात चक्र पिरामिड इसी आधार पर निर्मित सबसे शक्तिशाली उपाय है. इसे अपने घर के संरक्षण एवं अपने कार्यस्थल पर रखें.
दिशा एवं रंगों के अनुसार सिद्ध वास्तु उपाय
उत्तर दिशा
धन वृद्धि
* अपने कार्यक्षेत्र और निवास में सिद्ध वास्तु त्रिशक्ति यंत्र (त्रिशूल ओम स्वास्तिक)
लगाएं.
उत्तर पूर्व दिशा
नई योजनाएं
* यहां पीले फूल रखने से लाभ होता है.
* इस दिशा में नवग्रह चौकी एवं पीतल का शेर रखें.
पूर्व दिशा
स्वास्थ्य एवं परिवार
* इस दिशा में विष्णु-लक्ष्मी जी की पीतल की मूर्ति रखें.
दक्षिण पूर्व दिशा
धन का नियंत्रण
* इस दिशा में लाल रंग का जीरो वाट का बल्ब लगाएं और उसे हमेशा जलने दें.
* यहां पर पीतल के खरगोश का जोड़ा रखें.
दक्षिण दिशा
यश समृद्धि
* यहां पर तीन लाल रंग की मोमबत्ती रखें.
* यहां पर दौड़ते हुए 12 लाल रंग के घोड़े रखें.
दक्षिण पश्चिम दिशा
बचत एवं संबंध
* इस दिशा में सभी चीजों (फूल, कुशन,चित्र,लवबर्ड्स) जोड़े में लगाएं.
* यहां पर पीतल के नंदी जी और स्टार पिरामिड रखें.
पश्चिम दिशा
न्याय
* इस दिशा में किसी मंदिर या धर्मस्थल का बाहर से खींचा चित्र गोल्डन फ्रेम में लगाएं.
* यहां पर काले फ्रेम में गांव का चित्र लगाएं.
उत्तर पश्चिम दिशा
सहयोग
* इस दिशा में क्रिस्टल बॉल या क्रिस्टल वास रखें.
* यहां पर सुनहरे या सफेद रंग के 12 दौड़ते हुए घोड़े रखें.
* घर के ब्रह्म स्थान में नवग्रह पिरामिड की प्लेट स्थापित करें.
* बच्चों की बुद्धि के विकास और अच्छी पढ़ाई के लिए उनकी टेबल पर पीले-हरे रंग का पिरामिड रखें.
रंगोली विशेष
* घर के ब्रह्म स्थान में प्रवेश द्वार पर पीले, लाल या गोल्डन रंग की रंगोली बनाएं. चावल की ढेरी पर विघ्नहर्ता गणेश जी, श्रीयंत्र को विराजमान करें.
निषेध
* देवी-देवताओं की मूर्तियां उपहार में ना दें और ना ही लें, विनम्रतापूर्वक मना करें.
* टूटी हुई मूर्तियों की पूजा ना करें, बहते जल में प्रवाहित करें.
* टूटी हुई वास्तु उपाय सामग्री प्रयोग करने से हानि होती है.
* नीले व काले वस्त्र पूजा के समय धारण ना करें.
* राहु काल समय में पूजा ना करें.
* पिछले साल वाली मूर्तियां एवं सामग्री पानी में विसर्जन कर दें.
सौजन्य से
डॉ. संजय बंसल वास्तु रिसर्च सेंटर, 9810640143, 9910040143, 011-45142339

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