Home Uncategorized सरकारी तंत्र की गलतियों की सजा व्यापारी को क्यूँ और कब तक?

सरकारी तंत्र की गलतियों की सजा व्यापारी को क्यूँ और कब तक?

202
0
SHARE
सांकेतिक चित्र
प्रश्न- गिरीश जी मैं एक व्यापारी हूँ. दिल्ली के राजेंद्र नगर में ही आवासीय क्षेत्र में मेरा फर्स्ट फ्लोर पर आॅफिस है. जो कि मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा सील कर दिया गया है. जबकि मैं लगातार कन्वर्जन चार्जेस दे रहा था. मेरे भाई की रोहिणी में आवासीय क्षेत्र में दुकान है, उस पर भी लगातार सीलिंग का खतरा मंडरा रहा है. सरकार की रोज नई-नई बातें सुन-पढ़कर यह तय नहीं कर पा रहा हूँ कि अब आगे क्या करना चाहिए? भविष्य पूरा अंधकार में डूबा नजर आ रहा है. क्या यह ऐसे ही चलता रहेगा या फिर इसका कोई स्थाई समाधान निकलेगा? आपके लिखे लेख में अक्सर पढ़ता रहता हूँ और उसमें आप आम आदमी की पीड़ा को अच्छी तरह समझकर उसका बड़े ही प्रभावशाली ढंग से हल बताते हैं. कृपया बताएं कि अब हम क्या करें, कुछ समझ नहीं आ रहा है?
– जयदेव आनंद
Girish Sharma, Property Conslutant
उत्तर- जयदेव जी, आज हर तरफ हाहाकार का माहौल है. बिसलेरी की बोतल के साथ एयर कंडीशंड कमरों में बैठकर कभी भी कोई भी धरातल की सच्चाई का पता नहीं लगा सकता. इसके लिए तो निचले स्तर को साक्ष्य करके ही स्पष्ट तस्वीर का आंकलन किया जा सकता है. पिछले दिनों दिल्ली में किराड़ी का जागृति स्कूल सीलिंग का शिकार हुआ. उसमें 550 बच्चे पढ़ रहे थे. परीक्षाओं के दिन सिर पर हैं, इन बच्चों का क्या दोष? जिस जगह यह स्कूल है, वह एरिया अपने आप ही में अनधिकृत है. स्कूल की पुरानी बिल्डिंग जर्जर थी, इसलिए वहां नई बिल्डिंग का निर्माण किया गया था. आज से 10 वर्ष पहले जब सीलिंग की कार्रवाई हो रही थी, मैंने तब भी अपने लेखों द्वारा सरकार से यही प्रार्थना की थी, कि अनधिकृत निर्माण की सूची तैयार कर भारी जुर्माना लगाकर इन्हें रोक दिया जाए. परंतु नहीं, कुछ रिश्वतखोर उच्चाधिकारी अपनी जेबें भरते रहे और जनता को कहते रहे कि कुछ नहीं होगा बनाओ, हम देख लेंगे. जिन्होंने इन बिल्डिंग्स को बनने दिया, उन पर आज तक नाममात्र की भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह भी पढ़ें : सीलिंग के नाम पर राजनीति, क्रेडिट लेने के लिए लंबी खिंच रही प्रक्रिया  राजनीतिक पार्टियां इतनी राजनीतिक रोटियां सेक चुकी हैं, कि अब रोटियां जलने के कगार पर हैं. हम दिल्ली की अव्यवस्था के शिकार हैं, और सबसे ज्यादा जो भुक्तभोगी है वह दिल्ली का व्यापारी है. दिल्ली की जनता के कुछ सवालों का जवाब यदि कोई भी सरकार, सरकारी तंत्र, उच्चाधिकारी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय देते हैं तो दिल्ली के सभी व्यापारी, प्राइवेट स्कूल, प्राइवेट नर्सिंग होम, अपने कार्यालय और तमाम तरह की व्यापारिक गतिविधियों को स्वयं ही बंद कर लेंगे. क्या दिल्ली में कोई भी सरकार इतने सरकारी स्कूलों, अस्पतालों का निर्माण कर सकती है, जिससे कि लोगों को प्राइवेट जगहों पर गतिविधियों का रुख ना करना पड़े. अगर हमारी सरकारी एजेंसियां इतनी सक्षम होतीं, जिससे व्यापारियों को व्यापार करने के लिए सरकारी मूल्यों पर दुकानें, शोरूम इंडस्ट्रियल प्लॉट मिल जाते, हमारे युवाओं के साथ-साथ अन्य लोगों को सरकारी नौकरियां मिलतीं तो इतनी अधिक तादाद में व्यापारियों, डॉक्टर्स, छोटे बड़े स्कूल के मालिकों को कभी भी आवासीय क्षेत्रों का रुख ना करना पड़ता. मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ कि जब तक दिल्ली में बाहर से आने वाली जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं लगता, जो कि मेरी नजर में दूर-दूर तक संभव नहीं है. तब तक किसी भी सिविक एजेंसी को इतने जमे-जमाए कारोबार को जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी चलती है, मानवता के नाते उनको सील करने का कोई अधिकार नहीं है. अगर फिर भी सरकारी तंत्र इसी तरह लगातार सीलिंग जारी रखता है, तो यह ठीक उसी तरह होगा जिस तरह किराड़ी के जागृति स्कूल की इमारत के सील होने से भोले-भाले बच्चों को ठिठुरती सर्दी में यह सितम झेलना पड़ा. और प्रशासन केवल मूक बनकर देखता रहा, मानो हर गतिविधि से बेखबर हो.
मैं फिर से अपने पिछले अंकों में लिखी बात को दोहराता हूँ कि अब कोई भी सरकार या सरकारी तंत्र पिछले कई वर्षों में जो गलतियां कर चुके हैं, उनको न दोहराते हुए पूरी दिल्ली की 2017 के बाद किसी भी तरह कि अनधिकृत कंस्ट्रक्शन को तुरंत रुकवा दें. और सन 2018 से पहले के जितने भी अनधिकृत कंस्ट्रक्शन हैं, या आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियां हैं, को एक-एक करके कन्वर्जन चार्जेस या पेनाल्टी, जो भी उचित समझें उसे लेकर उन्हें रेग्यूलेराइज करें और व्यापारियों में व्याप्त भय को दूर करें. यदि आज ही इस तरह की शुरूआत करते हैं तो भी पूरी दिल्ली को सुव्यवस्थित करने में लगभग 7- 8 वर्षों का समय लग सकता है. और यदि इस तरह का कोई ठोस कदम न उठा पाए तो भविष्य में दिल्ली को स्लम बनने से न चाहते हुए भी कोई नहीं रोक पायेगा.
और अधिक जानकारी के लिए आप गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज Shanti Properties (Regd.) पर जाकर उनके पिछले लिखे लेख पढ़ सकते हैं और समय लेकर उनसे मिल भी सकते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here