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क्यों ना अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बनाएं, बच्चों को अनुशासित बनने के लिए प्रोत्साहित करें

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एजुकेशन डेस्क.
नई दिल्ली. 11 फरवरी. बच्चों के पैदा होते ही आजकल के माता-पिता उन्हें एक बहुत ही आरामदायक सुविधाओं से ओत-प्रोत वातावरण देते हैं. यह हम इसलिए देते हैं, कि हम यह समझते हैं, कि यह एक अच्छे माता-पिता की पहचान है. सुविधाओं का तो यह हाल है, कि आजकल के हमारे नन्हे शिशु खाना भी टीवी और मोबाइल के बगैर नहीं खाते. कितनी दर्दनाक व्यथा है इन बच्चों की, जो बचपन से ही सही क्रियाकलापों से वंचित रहते हैं. क्या नींव डलती है ऐसे बच्चों की, जो ना संस्कार, ना अदब और ना अनुशासन सीखते हैं. क्या माता-पिता दोषी नहीं इन सबके लिए? यह भी पढ़ें : पुनर्विवाह एक नया जीवन, कितना आसान-कितना मुश्किल.. अच्छी पोशाक, स्टाइल का टशन बच्चों को होशियार नहीं बनाता, बल्कि अच्छे संस्कार, अच्छा वातावरण, माता-पिता का दिया गया वक्त (क्वालिटी टाइम) बनाता है. बच्चों को अनुशासित बनने के लिए प्रोत्साहित करें. ज्यादा आरामतलब जिंदगी बच्चों को छोटे-छोटे कार्य करने से भी वंचित कर देते हैं और तब ऐसे बच्चे माँ-बाप पर बोझ बनते हैं. क्योंकि वह हर छोटी-बड़ी सहूलियत के लिए नौकर या माता-पिता की शक्ल देखने के आदी हो जाते हैं.
यह हमारे बच्चे हैं, इन्हें हम ही कम सुविधाएं देंगे तो ये आत्मनिर्भर बनेंगे. तब ना माँ-बाप पर, ना खुद अपने पर तथा ना समाज पर बोझ बनेंगे. तो आज से हर छोटे-बड़े काम के लिए बच्चों को आदत डालें कि वह अपना काम स्वयं करें.
(डॉ. अंजुमन नैय्यर, लेखिका एजुकेशनिस्ट हैं)

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