Home National अपराधमुक्त ‘स्वच्छ राजनीति’ के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुप्पी क्यों?...

अपराधमुक्त ‘स्वच्छ राजनीति’ के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुप्पी क्यों? सरकार तुरन्त अध्यादेश लाकर अपराधमुक्त राजनीति का रास्ता साफ करे- डॉ. रिखबचंद जैन

145
0
SHARE
Dr. Rikhab Chand jain, File Photo
संवाददाता.
नई दिल्ली. 22 अक्तूबर. भारतीय मतदाता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रिखचंद जैन ने अपराधमुक्त राजनीति के लिए राजनैतिक दलों के उपेक्षापूर्ण रवैय्ये पर दुख व्यक्त करते हुए कहा है, कि यह विडम्बना है, कि तीन तलाक, मीटू, एससी-एसटी एक्ट जैसे विषयों पर तो सभी राजनैतिक दलों के लोग, राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, भारत रत्न, पद्मश्री विभूषण इत्यादि अलंकरणों से नवाजे गए लोग जोर-शोर से अपना पक्ष रखने के लिए सामने आ खड़े होते हैं, लेकिन ये तमाम बड़े नाम आपराधिक तत्वों को राजनीति से बाहर रखने के विषय पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चुप्पी क्यूं साधे रखते हैं? डॉ. जैन ने कहा कि राजनीति में कानून बनाने वाले अगर अपराधी हों, संसद और विधानसभाओं में अपराधी हों, तो क्या यह देश, समाज एवं जनता के लिए नुकसानदेह नहीं है? उन्होंने कहा कि हर रोज अपराधिक राजनीतिज्ञों के दुष्कृत्यों से अखबार, पत्र-पत्रिकाएं और सोशल मीडिया भरता जा रहा है. नवम्बर में होने वाले पांच विधानसभाओं के चुनाव को देखते हुए भारतीय मतदाता संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरन्त बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से निवेदन किया है, कि कानून लाने में देरी होगी, इसलिए चुनाव को ध्यान में रखते हुए तुरन्त अपराधी लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के लिए अध्यादेश लाया जाये. लेकिन सरकार चुप है. मतदाता हैरान हैं. भारतीय मतदाता संगठन ने कहा है, कि अगर तीन तलाक पर सरकार अध्यादेश ला सकती है, तो राजनीति में अपराधियों की रोकथाम के लिए अध्यादेश क्यूँ नहीं लाया जा सकता है? क्या दलगत राजनीति राष्ट्रहित से ऊपर है? यह भी पढ़ें : ‘न चीनी उत्पाद, न चीनी उत्पात’ का नारा देते हुए भारत तिब्बत सहयोग मंच ने किया चीनी दूतावास पर प्रदर्शन भारतीय मतदाता संगठन ने चुनाव आयोग से भी निवेदन किया है, कि जो कुछ गाईडलाइन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आपराधिक राजनीतिज्ञों के लिए जारी की हैं, वह पर्याप्त नहीं है. प्रत्येक प्रचार सामग्री में भी अपराधी प्रत्याशी उम्मीदवार के नाम के आगे लाल डॉट का निशान लगाया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक मतदाता उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि से वाकिफ हो जाए. ऐसी जानकारी स्पष्ट रुप से मिलना प्रत्येक मतदाता का हक है. भारतीय मतदाता संगठन ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है, कि भारतीय मतदाताओं की इस मांग को क्रियान्वित किया जाये. साथ ही चुनाव में हारने या जीतने वाले किसी भी प्रत्याशी को सीमा से अधिक खर्च करने पर 20 साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जाये. जब चुनाव खर्च कम होगा, टिकटें नहीं बिकेंगी, अपराधी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे तभी देश को अच्छे राजनेता मिलेंगे और अच्छा सुशासन मिलेगा. विकास की गति बढेÞगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here