Home State News जीत के प्रति आश्वस्त, बेहतर काम पर वोट मिलेगा- हरीश अवस्थी

जीत के प्रति आश्वस्त, बेहतर काम पर वोट मिलेगा- हरीश अवस्थी

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Awasthi with Sisodiya

बवाना विधानसभा का उपचुनाव राजधानी के तीनों प्रमुख दलों के लिए नाक का सवाल बन गया है. आम आदमी पार्टी जहां राजौरी विधानसभा के उपचुनाव तथा निगम चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के चलते दबाव में है, वहीं कांग्रेस मौजूदा विधानसभा में अपना खाता खोलना चाहती है. इन सबसे अलग भाजपा के ऊपर अपना विजय रथ जारी रखने की चुनौती है. इस उपचुनाव से जुड़े तमाम मुद्दों पर हमने आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता हरीश अवस्थी का साक्षात्कार किया और तमाम मुद्दों पर उनसे बात की.


प्रश्न- राजौरी उपचुनाव तथा निगम चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद इस उपचुनाव में पार्टी पर कितना दबाव है?
उत्तर- निश्चित तौर पर एक दबाव तो है, हमने राजौरी उपचुनाव में शिकस्त खाई, निगम चुनाव के नतीजे भी हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. लेकिन तब से काफी चीजें बदली भी हैं. हमने इन हार के बाद सबक लिया है और अपने बेहतर काम के आधार पर जनता के बीच वोट मांग रहे हैं. उम्मीद करते हैं जनहित में हमने जो बेहतर काम किया है, उसके नतीजे अब दिखेंगे और आम आदमी पार्टी इस उपचुनाव में जीत दर्ज करेगी.
प्रश्न- इस मुकाबले को किस तरह से आंकते हैं?  बवाना में रैलियों का सुपर संडे
उत्तर- चुनाव की बात करें, तो इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में कड़ा मुकाबला है, लेकिन हम जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त हैं. हम निश्चित तौर पर इस सीट को जीतने जा रहे हैं, बस मार्जिन देखने वाली बात होगी. कड़ा मुकाबला इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हम बवाना की जनता का भरोसा कर सकते हैं, लेकिन ईवीएम पर भरोसा नहीं कर सकते. हालांकि अंतिम क्षणों में कोई खेल नहीं हुआ तो इस उपचुनाव में वीवीपैट की सुविधा होगी और हम सुनिश्चित जीत दर्ज करेंगे.
प्रश्न- कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेन्द्र कुमार यहां से चार बार विधायक रह चुके हैं. उन्हें यहां पर हैवीवेट कैंडीडेट माना जाता है, ऐसे में ‘आप’ के लिए क्या उम्मीदें बचती हैं?
उत्तर- हैवीवेट जैसा कुछ भी नहीं, कांग्रेस खुद हैवीवेट नहीं बची है, कैंडीडेट की तो बात ही कहां से उठती है. कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार की अपनी परेशानियां हैं. उनके सामने कांग्रेस और खुद उनकी अपनी इमेज का संकट है. एक ओर जहां उनका व्यवहार लोगों के साथ बेहतर नहीं रहा है, वहीं बवाना में डीडीए की जमीन अवैध तौर पर इधर-उधर करने के आरोप भी उनके ऊपर हैं. कुल मिलाकर कांग्रेस और उसके प्रत्याशी दोनों ही इमेज के संकट से जूझ रहे हैं.
प्रश्न- क्या भाजपा विधायक गुग्गन सिंह को पार्टी में शामिल करके आम आदमी पार्टी यह मैसेज देना चाहती थी, कि अगर भाजपा ऐसा कर सकती है तो ‘आप’ भी कम नहीं है?
उत्तर- मैसेज देने जैसा कुछ नहीं था. गुग्गन सिंह की क्षेत्र में एक प्रभावशाली और ईमानदार छवि है. वह एक ईमानदार विधायक रहे हैं. वहीं नारायण सिंह तीन बार निगम पार्षद रहे हैं और उनकी छवि भी बेदाग है. हमारी कोशिश यही रही है कि अच्छे लोग हमारे साथ जुड़ें और मिलकर आज की इस भ्रष्ट राजनीति को साफ-सुथरे रास्ते पर लेकर चलें. इसमें जो भी अच्छे लोग सहायक हो सकते हैं उनका पार्टी स्वागत करती है.
प्रश्न- आम आदमी पार्टी से ही भाजपा में शामिल हुए वेदप्रकाश भाजपा के प्रत्याशी है. इससे कितना नुकसान या फायदा आंकते हैं?
उत्तर- जहां तक मौजूदा भाजपा प्रत्याशी वेद प्रकाश का सवाल है, वह मौजूदा भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता के करीबी और सहयोगी रहे हैं. वेद प्रकाश ने जिन कारणों का हवाला देकर आम आदमी पार्टी से किनारा किया, उनमें सबसे बड़ा कारण विधायकों को फंड न मिलना बताया था. दिलचस्प यह है, कि विजेन्द्र गुप्ता भी उसी सदन के विधायक हैं और उन्होंने यह मसला कभी भी नहीं उठाया. भाजपा विधायक के सहयोगी होने के नाते वेद प्रकाश ने ओछी राजनीति करने की कोशिश की है. उनके इस दल-बदल का जवाब उन्हें बवाना की जनता देगी.
प्रश्न- भाजपा से आम आदमी पार्टी में आए इन नेताओं का चुनाव पर कितना प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- गुग्गन सिंह की बवाना क्षेत्र में एक रेपुटेशन है, ग्रामीण क्षेत्र में उनका बड़ा प्रभाव है. 24 घंटे के शॉर्ट नोटिस परउन्होंने गांव में एक बैठक बुलाई जिसमें लगभग दो हजार से ज्यादा लोग जुट गए, यह उनका प्रभाव दिखाता है.

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