Home Local News बिना नेतृत्व के सामूहिक विकास असंभव- संत कमल मुनि कमलेश

बिना नेतृत्व के सामूहिक विकास असंभव- संत कमल मुनि कमलेश

97
0
SHARE
धर्म विशेष.
नई दिल्ली. 10 अगस्त. नेतृत्व जितना सक्षम जुझारू और ऊर्जावान होगा, उतना ही वह जाति, धर्म, देश ऊंचाइयों के शिखर पर पहुंचेगा. नेतृत्व की क्षमता किसी-किसी में पाई जाती है. उसे प्रशिक्षित किया जाए तो कम समय और कम परिश्रम में ज्यादा सफलता पाई जा सकती है. उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश ने अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली के तीन दिवसीय समापन समारोह पर महावीर सदन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि नेतृत्व इंजन के समान होता है, यदि वह अंतर्मन की लगन से और निष्ठापूर्वक निस्वार्थ भाव से काम करें तो जन-जन के बीच पूजनीय बन सकता है. जैन संत कहा कि सामान्य व्यक्ति गलती करता है तो परिणाम खुद को ही भोगना पड़ता है. और यदि नेतृत्व दिशाहीन होता है तो उसका खामियाजा खुद तो भोगता होता ही है उसके साथ पूरी जाति और देश को भोगना पड़ता है. यह भी पढ़ें : चिरंजीलाल धानुका स्मृति समाजसेवा अवार्ड डॉ. जवाहर सूरी शेट्टी को, सेवा को भार नहीं, आभार मानें- डॉ. शेट्टी  एक नेतृत्व अमरबेल की भांति होता है जो अपनी पूर्ति के लिए सबका उपयोग कर लेता है. दूसरा नेतृत्व माली की भांति होता है जो खून-पसीना बहाकर सबको सींचने का काम करता है. राष्ट्रसंत ने कहा कि वर्चस्व की लड़ाई ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा है. निस्वार्थ में कमी पड़ने पर सबको कुचलने में भी शर्मिंदगी महसूस नहीं करता है, उससे बड़ा शत्रु और कोई नहीं हो सकता है. मुनि कमलेश ने कहा कि बिना नेतृत्व के सामूहिक विकास असंभव है. समय, शक्ति, पैसा भी समस्या से मुक्ति नहीं दिला सकता. यह क्षमता एक्ट गॉड गिफ्ट के रूप में मिलती है और दूसरा निरंतर प्रयास करने से हर व्यक्ति अपने में यह क्षमता पैदा कर सकता है. मुनि कमलेश ने कहा कि सफलता के लिए नेतृत्व मिशन में आॅक्सीजन से भी महत्वपूर्ण है. युवा प्रतिभाओं को इसलिए तैयार करना होगा कि वे परस्पर नेतृत्व संघर्ष के बजाय समन्वय से काम करें. इस अवसर पर राष्ट्रीय हिंदू महासभा के प्रमुख नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पड़पौती राज्यश्री चौधरी ने मुख्य अतिथि के रुप में कहा कि गुरु के आदेश-निर्देश के अनुसार काम करने वाला हमेशा सफलता की ओर अग्रसर होता है. भगवान का दूसरा रूप गुरु है, इनका नेतृत्व भगवान की शक्ति से कम नहीं होता है. राष्ट्रसंत के कलकत्ता चातुर्मास के उपलक्ष्य में उन्होंने अपने एनजीओ की 5 एकड़ जमीन में बनी गौशाला गुरुदेव के चरणों में समर्पित करते हुए कहा कि उसे रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा. इस अवसर पर दिवाकर मंच की ओर से श्रीमती चौधरी को महिला शाखा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here