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‘रेरा’ अप्रवूड प्रोजेक्ट्स में ही सुरक्षित है आपका निवेश

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सांकेतिक चित्र
प्रश्न- गिरीश जी, मैं आपसे जानना चाहता हूँ कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में काफी संख्या में बिल्डर फ्लैट्स मौजूद हैं. कुछ अंडर कंस्ट्रक्शन हैं, कुछ पूरे होने से कुछ ही दूरी पर हैं. और कुछ सोसायटीज में तो काम ही रुका हुआ है. आप बताएं कि हम किस तरह पता करें, कि हम किस सोसाइटी में घर लें, जिसमें कि हमारा घर एवं पैसा दोनों ही सुरक्षित रहें. और साथ ही भविष्य में हमें किसी विवादित स्थिति का सामना ना करना पड़े. अक्सर न्यूज पेपर्स में न्यूज के जरिए बिल्डर फ्लैट की स्थिति का पता तो चलता रहता है, लेकिन डिफॉल्टर बिल्डर के बारे में एकदम सही पता किस प्रकार चले? कृपया बताएं ताकि हम उसी प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट करें. -अनिल भूटानी
Girish Sharma, property conslutant
उत्तर- अनिल जी, पिछले कुछ वर्षों से रियल्टी क्षेत्र इस प्रकार की खबरों से भरा पड़ा है. मुख्य एवं बड़े बिल्डर सुपरटेक, आम्रपाली एवं जे.पी. इत्यादि इन्होंने अपने प्रोजेक्ट को समय पर ग्राहकों को न देने के कारण मार्किट में अपनी साख गिरा ली है. इन बड़े बिल्डर प्रोजेक्ट्स का यह हश्र देखकर ग्राहक काफी डरा हुआ है. क्योंकि रियल्टी सेक्टर में नाम की बहुत वैल्यू है. एक बड़ा नाम होने से ना जाने फ्लैट की कितनी यूनिट्स हाथों-हाथ बिक जाती हैं. और ग्राहक को किसी प्रकार का संदेह भी नहीं रहता. और वही बड़े बिल्डर जब मार्किट में इस प्रकार का काम कर जाते हैं, तो वहां जिस भी व्यक्ति ने अपनी खून-पसीने की कमाई लगाई होती है, तो वह अपने आपको ठगा सा महसूस करता है. यह भी पढ़ें : ‘रेरा’ के चलते नियमित हो रहा बाजार, ग्राहकों में बढ़ा भरोसा  वह समझ नहीं पाता कि क्या करे और कहां जाए? इस समय प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बिल्डर्स के पास पैसे ही नहीं हैं. इसी वजह से नए कानून ‘रेरा’ में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है, कि खरीददारों से लिए गए पैसे का 70 प्रतिशत बिल्डर को उसी प्रोजेक्ट में लगाना आवश्यक है. बीते वर्षों में होम बायर्स को जिस मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा यह किसी से भी छुपा नहीं है. डिफॉल्टर बिल्डर्स के प्रोजेक्ट में जिन भी लोगों ने अपना पैसा लगाया, वह तरह-तरह से प्रदर्शन कर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं. परंतु उनकी मुश्किलों की सुनवाई होने में अभी समय लगेगा. क्योंकि इतनी बड़ी समस्या का समाधान निकालना आसान नहीं होता. पिछले सालों में रियल एस्टेट में ट्रांसपेरेंसी ना होने के कारण इस प्रकार के मामले सामने आए हैं. बिल्डर ने एडवांस में पैसा तो सभी ग्राहकों से ले लिया, परंतु उस प्रोजेक्ट में लगाया नहीं. उस समय तो यहां तक भी देखा गया कि अपने विज्ञापनों को जरिया बनाकर ग्राहकों से पैसा ऐंठ लिया गया, जबकि बिल्डर के पास प्रोजेक्ट के लिए जमीन तक नहीं थी. पिछले वर्ष सरकार द्वारा पारित ‘रेरा’ कानून ने रियल एस्टेट इंडस्ट्री में सबके भरोसे को जगह दी है. इस कानून से बिल्डर व ग्राहक दोनों के हितों की रक्षा होगी. आपके सवाल के जवाब में मैं यह कहना चाहता हूँ कि आप, मेरे अन्य सभी पाठक एवं मार्किट में मौजूद सभी ग्राहकों को दृढ़ निश्चय कर केवल ‘रेरा’ अप्रूव प्रोजेक्ट्स में ही अपना पैसा लगाना चाहिए. जिससे कि आप झंझटों से बच सकें और आपकी पूंजी भी सुरक्षित रहे. क्योंकि इन ‘रेरा’अप्रूव प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी की संभावना ना के बराबर है. हालांकि बिल्डर्स के जो पुराने प्रोजेक्ट्स हैं, वह फिलहाल ‘रेरा’ से बाहर होने के कारण आपको दिख रहा है कि वो प्रोजेक्ट रुके हुए हैं. लेकिन धीरे-धीरे उन सभी पुराने प्रोजेक्ट्स को ‘रेरा’ के अंतर्गत लाया जाएगा. वर्तमान समय में अपने ड्रीम होम को खरीदने से पहले बहुत सारा होमवर्क करने की आवश्यकता है. मेरी आपसे गुजारिश है, कि किसी भी डील को फाइनल करने से पहले एक दो बार नहीं सौ बार सोचें.
और अधिक जानकारी के लिए आप गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज Shanti Properties (Regd.) पर जाकर उनके पिछले लिखे लेख पढ़ सकते हैं.
‘केवल नाम ही काफी है’

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